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school se judi Kuchh yaade

ओ कान्हा ओ कान्हा

श्याम मुरली बजा दो

समझदार सब हैं

खुश हूं मैं

संभलना अच्छा है

Kaas esa ho jaaye

मैं खुश था

मुसाफिर

ख्वाब तेरे

बन गई कविता

शायर के जुबां शायरी

उदास हैं तो खुश भी बहुत हैं