शायर के जुबां शायरी

1. यहां हर रोज एक नया चेहरा सामने आता है
   कोई मासूम लगता है तो कोई मासूम बन कर दिखाता है
   यहां सब खेल समझते हैं दिलों के साथ खेल कर
   क्योंकि उन्हें ऐसा करने में मजा आता है/

2.  खामोश है जुबां दिल बोलना चाहता है
      दिल तो बस धड़कनों पर तेरा नाम चाहता है

3.  कोई अमर नहीं होता
     इस दुनिया में आकर के
     तुमको अमर किया मैंने
     इस दिल में लाकर के

4. बातों को घुमा फिरा कर कहने पर भी
   कोई बातों को आसानी से समझ जाता है
   लेकिन किसी से सीधे बोलने पर भी
   वह उसकी बात को नहीं समझ पाता है

5.  बातों में थोड़ी सी गहराई है
     जिसे समझना बहुत मुश्किल है
     कोई कहीं भी बस सकता है मगर
     हर किसी के दिल में बसना मुश्किल है

6.   किसी महफ़िल में मेरे जिक्र की शुरुआत हुई
      वह महफिल छोड़कर जाने लगे
      मेरे कत्ल की तैयारी उनके सामने हुई तो
      वह जोर-जोर से खुशी के गीत गाने लगे

7. अक्सर अल्फाज कम पड़ ही जाते हैं
     किसी को अल्फाज बयां करने के लिए
     लेकिन किसी के पास अल्फाज ही नहीं होते
     किसी को कुछ बयां करने के लिए

8.  मुस्कुराते हुए अच्छी लगती हो तुम मुस्कुराया करो
     तुम्हारी आवाज अच्छी लगती है तुम गाया करो

9. काबिल ए तारीफ काम क्या करें
    हम बदनाम ही बहुत हैं
    लोग बदनाम अक्सर उन्हें करते हैं
    जिनकी तारीफे बहुत है

10.  हम मुस्कुराए और खुद ही से पूछा मुस्कुराने की    वजह क्या है
      दिल से एक ही आवाज आएगी तू किसी को चाह ने लगा है

11.  सब कुछ है मेरे पास सच कहूं तो तू भी है
        यह दिल जो धड़कता है सीने में वह तू ही है

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