समझदार सब हैं
पर बात यहां कोई समझे
तब शायद बात बने
खेलना यह सोचकर
कि, जीतना है हमें
पर हार कोई समझे
तब शायद बात बने
सोच कर जीना यहां
कि, पानी में भी जहर है
जहर को अमृत कोई समझे
तब शायद बात बने
अनजान है यहां सभी
कोई मतलब नहीं किसी से
सभी को अपना कोई समझे
तब शायद बात बने
किस्मत यही थी शायद
उसकी फितरत ही यही है
अगर खुद को कोई समझे
तब शायद बात बने
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