बन गई कविता

फूलों से महकते बागों को
सपनों से सजे उन ख्वाबों को
भंवरे के भंवराने को
तितली के उड़ जाने को
लिख दिया मैंने,तो बन गई कविता
पेड़ों के लहराने  को
पानी के बह जाने को
कोयल के मीठे गाने को
चिड़िया को तिनका लाने को
लिख दिया मैंने,तो बन गई कविता
खेतों की हरियाली को
सुबह मिलती चाय की प्याली को
वक्त के बदलने को
माटी से बर्तन ढलने को
लिख दिया मैंने,तो बन गई कविता /

Comments